घर के सामने सड़क किनारे लगा पेड़

घर के सामने सड़क किनारे लगा पेड़

तू बसा है हमारी यादों में, जो चला गया छोड़कर बहुत आएगा आँखों में।
जब से हमने संभाला था होश तुझे लहलहाते पाया था अपने आँगन में।
अब जब तुझे मिटा दिया जाएगा यहाँ से,हमारे दिल का एक कोना अंधेरा हो जाएगा। अब जेठ की चिलचिलाती धूप में ,वो सुकून भरा नज़ारा न होगा।
गुज़रने वाले मुसाफिरों का अनायास ठहरना न होगा ,और हम भी शायद अब घर से बाहर न निकलें दोपहर में,
क्योंकि तुम्हारे स्थान का यह सुनापन हमारी आँखों में खटकेगा ।
याद आएगा हमें तुम पर वो फूलों का खिलना,झुलसाती हुई गर्मियों में वो ठंडी छाँव देना।
सोचते हैं अब सुबह-शाम हम किसकी पत्तियाँ बुहारेंगे,तुम्हारे बिना लोग हमारे घर का पता कैसे पहचानेंगे।
तुम तो एक पल में छोड़ जाओगे हमें वर्षों साथ रहने के बाद,पर क्या कभी सोचा है तुमने …………………….

……………………कि हम तुम्हें कैसे भूल पाएंगे।

-कवि चेतन कुमार गुप्ता

Chetan kumar gupta

Website: http://www.kavikumargupta.com

हेलो मैं चेतन कुमार गुप्ता मैं एक शिक्षक हूँ मैं पिछले 15 वर्षों से शिक्षक के रूप मैं देश की सेवा करने का प्रयास कर रहा हूँ अपने इस कार्य को मैं व्यवसाय से अधिक जिम्मेदारी मानकर करने का सदैव प्रयत्न करता रहता हूँ जहाँ तक मेरी पढाई लिखाई का सवाल है मैंने इलेक्ट्रॉनिक्स विषय मैं मास्टर डिग्री की है उसके बाद बी एड किया था मुझे कवितायेँ लिखने का शौक स्कूल के दिनों से ही है मुझे मुख्य रूप से दर्द प्रेम व्यथा संस्कारों की कवितायेँ लिखना पसंद है

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