दीपावली

दीपावली

लाई हूँ आँचल में भरकर उजाला
अँधेरे दिलों को जो रोशन करेगा।
खुशियाँ मनाओ यह है मेरा संदेशा,
गम का ना साया तुम पर पड़ेगा।


लाई हूँ शुभ को मैं साथी बनाकर,
हर एक उद्यम जो सफल करेगा।
काल को अपना अनुचर बनाकर,
अमंगल नहीं सिर्फ मंगल करेगा।


लाई हूँ राम को मैं वापस अयोध्या,
हर एक उजाड़ जो आबाद करेगा।
टूटे हुए हृदयों के टुकड़े जोड़कर,
उनमे जीवन का संचार करेगा ।


लाई हूँ नयनों में जीवन की ज्योति,
कर्मपथ जिससे प्रकाशित होगा।
अपना लो इनको न सोचो जरा भी,
अंधकार का नामोनिशां न रहेगा।४

लाई हूँ होंठों पर प्रार्थनाएं सजाकर,
हर शब्द जिनका स्वीकार होगा।
उठकर मुझे तुम गले से लगा लो,
हर दर्द तुम्हारा, तुम्हारा न होगा।


लाई हूँ लक्ष्मी को अंगुली पकड़कर,
घर-द्वार तुम्हारा समृद्ध होगा।
मत खोना ऐसा स्वर्णिम अवसर,
सिर्फ आज मिला है— कल नहीं मिलेगा।



कवि चेतन कुमार गुप्ता

Chetan kumar gupta

Website: http://www.kavikumargupta.com

हेलो मैं चेतन कुमार गुप्ता मैं एक शिक्षक हूँ मैं पिछले 15 वर्षों से शिक्षक के रूप मैं देश की सेवा करने का प्रयास कर रहा हूँ अपने इस कार्य को मैं व्यवसाय से अधिक जिम्मेदारी मानकर करने का सदैव प्रयत्न करता रहता हूँ जहाँ तक मेरी पढाई लिखाई का सवाल है मैंने इलेक्ट्रॉनिक्स विषय मैं मास्टर डिग्री की है उसके बाद बी एड किया था मुझे कवितायेँ लिखने का शौक स्कूल के दिनों से ही है मुझे मुख्य रूप से दर्द प्रेम व्यथा संस्कारों की कवितायेँ लिखना पसंद है

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